MP GK 2026: मध्य प्रदेश के प्रमुख लोक गायन (Folk Songs of MP) | क्षेत्रवार विवरण, MCQ एवं Revision Notes
MP GK 2026: मध्य प्रदेश के प्रमुख लोक गायन (Folk Songs of MP) | क्षेत्रवार विवरण, MCQ एवं Revision Notes
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मध्य प्रदेश की लोक संस्कृति में संगीत और गायन की एक समृद्ध परंपरा रही है। राज्य स्तरीय परीक्षाओं (जैसे MPPSC Prelims Unit 1 & Unit 10, MP Police, MP SI, MP Forest Guard और MP ESB/Vyapam) में मध्य प्रदेश के लोक गायन (Folk Singing Styles of MP) से जुड़े प्रश्न लगातार पूछे जाते हैं।
आज के इस अपडेटेड आर्टिकल में हम मध्य प्रदेश के चारों प्रमुख सांस्कृतिक अंचलों (मालवा, बुंदेलखंड, निमाड़, बघेलखंड) की लोक गायन शैलियों का संपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन करेंगे।
मध्य प्रदेश के लोक गायन का क्षेत्रवार वर्गीकरण
मध्य प्रदेश के लोक गायन को क्षेत्रीय और सांस्कृतिक विशेषताओं के आधार पर 4 मुख्य भागों में विभाजित किया गया है:
1. मालवा अंचल के लोक गायन
- भरथरी गायन (Bharthari Gayan): यह मालवा अंचल में नाथ संप्रदाय के लोगों द्वारा चिंकारा वाद्ययंत्र पर राजा भरथरी, रानी पिंगला और कबीर के पदों को गाने की प्रमुख शैली है।
- संझा गीत (Sanjha Geet): कुंआरी लड़कियों द्वारा पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) के दौरान शाम के समय गोबर और पत्तियों से संझा बनाकर गाए जाने वाले पारंपरिक गीत।
- हीड़ गायन (Heed Gayan): मालवा में अहीर और गवली समुदाय द्वारा श्रावण मास (सावन) में कृषि और मवेशी समृद्धि हेतु गाया जाने वाला ओजस्वी गायन।
- बरसाती बारता (Barsati Barta): चंपू काव्य शैली (गद्य व पद्य का मिश्रण) में वर्षा ऋतु में गाया जाने वाला लोक संगीत।
2. बुंदेलखंड अंचल के लोक गायन
- आल्हा गायन (Alha Gayan): बुंदेलखंड का सर्वप्रमुख और विश्व का सबसे लंबा लोकगाथा गायन। जगनिक द्वारा रचित 'आल्हाखंड' पर आधारित इस गायन में आल्हा और उदल की 52 लड़ाइयों का बीर रस में वर्णन किया जाता है। ढोलक और मंजीरा इसके प्रमुख वाद्ययंत्र हैं।
- फाग गायन (Bambulia / Phag): होली के अवसर पर गाया जाने वाला ओजस्वी शृंगारिक गायन।
- भोला गीत / बमुलिया (Bambulia): शिवरात्रि, बसंत पंचमी और मकर संक्रांति के अवसर पर भगवान शिव की भक्ति में बिना किसी वाद्ययंत्र के गाया जाने वाला वाचिक गायन।
- हरदौल की मनौती (Hardaul ki Manoti): बुंदेलखंड में हरदौल की वीरता और त्याग की स्मृति में गाया जाने वाला लोक गायन।
3. निमाड़ अंचल के लोक गायन
- कलगी-तुर्रा (Kalgi Turra): यह निमाड़ का सबसे प्रसिद्ध प्रतिस्पर्धात्मक (शायरी/अखाड़ा शैली) लोक गायन है। इसमें दो अखाड़े (कलगी-पार्वती पक्ष और तुर्रा-शिव पक्ष) चांग वाद्ययंत्र की थाप पर सवाल-जवाब करते हैं।
- संत सिंगाजी के पद (Sant Singaji Gayan): निर्गुणी काव्यधारा पर आधारित निमाड़ के महान संत सिंगाजी की स्मृति में मृदंग और झांझ पर गाया जाने वाला आध्यात्मिक गायन।
- नाथपंथी गायन: प्रात:काल में नाथ संप्रदाय के गायकों द्वारा कबीर और गोरखनाथ की वाणियों का गान।
- फाग और मसान्या (Kaya Khoj): मृत्यु के अवसर पर गाया जाने वाला वैराग्य प्रधान लोक गायन।
4. बघेलखंड अंचल के लोक गायन
- विदेशिया गायन (Videshiya Gayan): बघेलखंड में वियोग श्रृंगार रस पर आधारित अत्यंत लोकप्रिय गायन। इसमें पति के परदेस जाने पर पत्नी के विरह भाव को गाया जाता है।
- बांस गायन (Bans Gayan): यह केवल बघेलखंड में ही गाए जाने वाला अनूठा गायन है, जिसमें लंबे बाँस (बांसुरी रूपी वाद्य) का प्रयोग करके अहीर समुदाय द्वारा मोरध्वज और बसंत की कथाएँ गाई जाती हैं।
- फाग व बसदेवा (Basdeva Gayan): हरबोले जाति के लोगों द्वारा सिर पर भगवान कृष्ण की मूर्ति रखकर गाया जाने वाला धार्मिक लोक गायन।
- बिरहा गायन (Birha Gayan): बघेलखंड में कृषि कार्यों और उत्सवों के दौरान प्रश्नोत्तर शैली में गाया जाने वाला श्रृंगारपरक गायन।
Quick Revision Table: MP Folk Singing Overview (2026)
| अंचल | प्रमुख लोक गायन | मुख्य विषय / वाद्ययंत्र / विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| मालवा | भरथरी, संझा गीत, हीड़, बरसाती बारता | चिंकारा वाद्य, नाथ संप्रदाय, श्राद्ध पक्ष व सावन उत्सव |
| बुंदेलखंड | आल्हा गायन, बमुलिया (भोला), हरदौल की मनौती | बीर रस (आल्हा-ऊदल), जगनिक रचित, शिव भक्ति (बिना वाद्य) |
| निमाड़ | कलगी-तुर्रा, संत सिंगाजी के पद, मसान्या | प्रतिस्पर्धात्मक शैली (शिव-पार्वती अखाड़ा), निर्गुणी पद, चांग वाद्य |
| बघेलखंड | विदेशिया, बांस गायन, बिरहा, बसदेवा | वियोग श्रृंगार, विशाल बांस वाद्ययंत्र, हरबोले जाति |
MP GK Practice Quiz: महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
Q1. 'आल्हाखंड' की रचना किसने की थी, जिस पर बुंदेलखंड का प्रसिद्ध आल्हा गायन आधारित है?
(A) ईसुरी
(B) जगनिक
(C) संत सिंगाजी
(D) घाघ
उत्तर: (B) जगनिक
Q2. निमाड़ अंचल का प्रसिद्ध 'कलगी-तुर्रा' गायन मुख्य रूप से किस प्रकार की शैली है?
(A) विरह गायन
(B) हास्य प्रहसन
(C) प्रतिस्पर्धात्मक (प्रश्नोत्तर) अखाड़ा शैली
(D) केवल महिलाओं द्वारा गाया जाने वाला गीत
उत्तर: (C) प्रतिस्पर्धात्मक (प्रश्नोत्तर) अखाड़ा शैली
Q3. 'भरथरी गायन' में मुख्य रूप से किस वाद्ययंत्र का प्रयोग किया जाता है?
(A) मृदंग
(B) चांग
(C) चिंकारा
(D) ढोलक
उत्तर: (C) चिंकारा (अंचल: मालवा)
Q4. विरह और वियोग श्रृंगार पर आधारित 'विदेशिया गायन' मध्य प्रदेश के किस क्षेत्र में प्रसिद्ध है?
(A) मालवा
(B) बघेलखंड
(C) बुंदेलखंड
(D) निमाड़
उत्तर: (B) बघेलखंड
Q5. 'बमुलिया' या 'भोला गीत' बिना किसी वाद्ययंत्र के किस अंचल में गाया जाता है?
(A) बुंदेलखंड
(B) निमाड़
(C) मालवा
(D) चंबल
उत्तर: (A) बुंदेलखंड
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Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1: 'कलगी' और 'तुर्रा' किसके प्रतीक माने जाते हैं?
उत्तर: निमाड़ के कलगी-तुर्रा गायन में 'कलगी' को शक्ति (देवी पार्वती) का और 'तुर्रा' को शिव (भगवान भोलेनाथ) का प्रतीक माना जाता है।
Q2: मध्य प्रदेश का सबसे प्रसिद्ध और वीर रस प्रधान लोक गायन कौन सा है?
उत्तर: बुंदेलखंड का **आल्हा गायन** सबसे प्रसिद्ध वीर रस प्रधान लोक गायन है।
Q3: MPPSC परीक्षा के लिए कौन-कौन से लोक गायन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर: आल्हा गायन (बुंदेलखंड), भरथरी (मालवा), कलगी-तुर्रा (निमाड़), और विदेशिया/बांस गायन (बघेलखंड) परीक्षाओं में सबसे अधिक पूछे जाने वाले गायन हैं।
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